॥ माता सीता आरती ॥

जय माता सीता, जानकी जय।
धन्य धरा, पावन काय।
जनकपुर की लालिमा,
धैर्य और भक्ति की छाया।
राम भक्तों की रक्षा करो,
संकट और दुःख हराया।
धैर्य और संयम की प्रतिमा,
त्याग और मर्यादा की देवी।
भक्ति भाव से जो तुम्हें स्मरे,
सुख और शांति पाता वही।
राम लखन सीता के संग,
धर्म और प्रेम का दीप जले।
असुर और अज्ञान का नाश करे,
भक्तों के मन को आलोकित करे।
जो कोई आरती प्रेम से गावे,
माता सीता उनकी रक्षा करे।
सत्य, धर्म और भक्ति की राह दिखाए,
जीवन में मंगल और आनंद भर दे।
दोहा:
आरती माता सीता की,
सदैव गाओ भक्ति भाव से।
राम नाम और धर्म मार्ग दिखलाए,
भवसागर से पार ले जाए।
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