॥ माता सीता चालीसा ॥

दोहा
जय जय जय सीता माता,
धैर्य, भक्ति और सत्य की छाया।
जनकपुर की धन्य कन्या,
रामलक्ष्मण संग सुशोभित माया॥
चालीसा
- श्री जानकी माता भवानी,
स्नेह और भक्ति की देवी सुहानी। - जनकधन्य जननी जगत प्यारी,
सत्य और धर्म की अधिष्ठात्री हमारी। - वनवास में भी अनन्त धैर्य,
रामप्रियता में अद्भुत संयम सर्वत्र। - रावण के बंदन में भी स्थिर,
भक्तों के मन में बसा अमर विचार। - अग्निपरीक्षा दी पावनधारा,
सत्यनिष्ठा की प्रतिमा जग में उजारा। - त्याग और मर्यादा की प्रतिमूर्ति,
सीता माता सब पर कृपा दृष्टि। - राम लक्ष्मण के संग सुशोभित,
भक्ति और प्रेम में जग उजागरित। - असुर और अज्ञान का नाश करै,
भक्तों के जीवन में सुख भरै। - धरती माता का अवतार सुशोभित,
सीता माता का नाम सर्वत्र गूंजित। - जो भी भक्त भाव से स्मरे,
संकट और दुःख से मुक्त पाए।
दोहा
जय जय जय सीता माता,
सत्य और भक्ति की अनुपम छाया।
राम नाम और धर्म की राह दिखाए,
भक्तों के जीवन में मंगल लाए॥
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